स्वामी विवेकानंद के गुरु - श्री रामकृष्ण परमहंस के साथ उनका परिचय और उनसे मिलन

 


परिचय:-

श्री रामकृष्ण परमहंस (1836-1886) एक महान आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने धार्मिक जगत में अपनी अद्भुत धार्मिक अनुभवों और उत्साहदायक प्रचार के लिए विशेष पहचान बनाई। वे कोलकाता के नामवरी ग्राम में जन्मे थे और उनका मूल नाम 'गदाधर चट्टोपाध्याय' था।

मुलाकात:-

नरेंद्र नाथ दत्त, जिन्होंने बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त की थी, उन्हें 18 वर्षीय होते हुए श्री रामकृष्ण परमहंस से पहली बार देखने का अवसर मिला। 1 नवंबर 1881 को नरेंद्र नाथ ने काली माता के मंदिर में कोलकाता के दक्षिणेश्वर की मंदिर में उनसे मुलाकात हुई।


उनके परिचय के समय, श्री रामकृष्ण परमहंस ने नरेंद्र नाथ के आंतरिक प्रकाश को देखकर उन्हें बड़े प्रसन्नता से गले लगाया और कहा, "आज से तू मेरा पुत्र, मेरा नरेंद्र है।" इस अपनापन और प्रेम के संबंध में, वे दोनों एक-दूसरे को समर्पित करने लगे और नरेंद्र ने अपने गुरु के शिष्य बनने का संकल्प किया।

श्री रामकृष्ण परमहंस के गुरु बनने के बाद, नरेंद्र ने अपने गुरु के अध्यात्मिक आचार्य से उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक साधना में निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त किया। उन्होंने श्री रामकृष्ण परमहंस के मार्गदर्शन में योग और वेदांत विचारों का अध्ययन किया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा को उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए उनके प्रेरक संदेशों का पालन किया।

इस प्रकार, श्री रामकृष्ण परमहंस ने स्वामी विवेकानंद को उनकी आध्यात्मिक अनुभवों से प्रभावित किया और उन्हें उन्नत धार्मिक समझ और ज्ञान के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद की जीवन की इस महत्वपूर्ण पहलू का अध्ययन हमें उनके धार्मिक और आध्यात्मिक संदेशों को समझने में मदद करता है।

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